पार्श्व एकादशी / परिवर्तिनी

ब्रह्मांडीय निद्रा के दौरान भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। यह चातुर्मास का मध्य बिंदु है।

अगली तिथिशनिवार, 11 सितंबर 2027313 दिन बाद
देवता
विष्णु
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

महत्व

पार्श्व का अर्थ है "करवट।" चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु सर्पराज शेष पर विश्राम करते हैं। देवशयनी एकादशी पर वे शयन करते हैं। पार्श्व एकादशी पर वे बाईं करवट लेते हैं। प्रबोधिनी एकादशी पर वे जागते हैं। यह एकादशी चार माह की ब्रह्मांडीय निद्रा के मध्य बिंदु का प्रतीक है। चूँकि यह भाद्रपद मास में पड़ती है, इसलिए यह वामन अवतार से भी जुड़ी है।

कैसे मनाते हैं

कमल के फूलों से विष्णु पूजा, वामन पुराण का पाठ, रात्रि जागरण

व्रत

एकादशी व्रत

पार्श्व एकादशी / परिवर्तिनी — तिथियाँ

  • मंगलवार, 22 सितंबर 20262026
  • शनिवार, 11 सितंबर 20272027
  • बुधवार, 30 अगस्त 20282028
  • मंगलवार, 18 सितंबर 20292029
  • रविवार, 8 सितंबर 20302030

तिथियाँ भारत (IST) के अनुसार हैं। तिथि का समय स्थान के अनुसार बदलता है; तत्त्व ऐप आपके शहर के लिए गणना करता है।

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